वाह-वाही लूटने के धुन में
रहते हैं गृहमंत्री कंवर
नक्सलियों को कहां से पकड़ेंगे!
अब्दुल हमीद
रायपुर । छत्तीसगढ़ में सत्ता संभालने के बाद से ही मुख्यमंत्री, गृहमंत्री को नक्सली समस्या सुलझाने पर ध्यान देना था परंतु सरकार ने सत्ता में आते ही नक्सली समस्या को गौण समझा और ध्यान नहीं दिया। गृहमंत्री बनने के बाद ननकीराम कंवर ने तो नक्सली समस्या पर ध्यान देने की बजाय सत्ता के मद में ही खोए रहे और थोड़े समय बाद शराब की अवैध बिक्री पर ध्यान देना शुरू किया। शराब की अवैध बिक्री को पुलिस वालों पर सख्ती करके भी सुलझाया जा सकता है लेकिन गृहमंत्री ने वाह-वाही लूटने के धुन में और आम जनता के बीच नाम कमाने के लिए ही दारू और छोटे-मोटे मामलों पर ही ध्यान देते रहे। नई सरकार के सत्ता संभालने के पांच माह बाद नक्सलियों के हाथों कई लोगों के शहीद हो जाने के बाद गृहमंत्री कंवर ताल ठोंककर कह रहे हैं डेढ़ साल में नक्सली समस्या खत्म कर देंगे! यह कैसे संभव है? क्या सत्ता संभालने के बाद उन्हें नक्सली समस्या, समस्या नहीं लग रहा था कि वे देखना चाह रहे थे कि नक्सली कितने लोगों को शहीद करेंगे उसके बाद हम उनसे लोहा लेंगे। डेढ़ साल में नक्सली समस्या को खत्म करने के लिए उनके पास कहां से इतनी ताकत एकत्र कर लेंगे। केंद्र सरकार ने नक्सली समस्या को गंभीर माना है और वह भी प्रदेश सरकार को समय-समय पर मदद करती रहती है। अगर गंभीरता से सोचा जाए तो यह अजब बात ही लगती है कि गृहमंत्री कंवर ने फिर वाह-वाही लूटने के लिए यह घोषणा कर डाली है। कागजी और जुबानी तौर-तरीकों से अगर समस्याएं हल हो जाती तो नक्सली समस्या कभी की सुलझ गई होती। मुख्यमंत्री महोदय को भी समझ लेना चाहिए था कि जब नक्सलियों को उन्होंने वार्ता के लिए न्यौता दिया और उसे उन लोगों ने ठुकरा दिया तब ही समझ लेना था कि नक्सलियों की ताकत एक सरकार के समानांतर हो चुकी है और सीधी लड़ाई की जब मुख्यमंत्री ने घोषणा की तब भी नक्सलियों ने ही अपनी ताकत पहले दिखाई और दिखा रहे हैं। हाल-फिलहाल तो उन्होंने 15 जवानों को शहीद और कई जवानों को अपंग कर दिया है।अब दारू समस्या को देखें कैसे गांव-गांव में दारू पहुंच जाता है। यह समस्या छत्तीसगढ़ बनने के बाद ही शुरू हो गई थी। शराब की अवैध बिक्री शराब ठेकेदारों द्वारा ही कराई जाती है ताकि लोगों को शराब की पूर्ति बराबर होती रहे और गांव के लोग शराब के लिए पल-पल मचलते रहें। तभी ग्रामीण क्षेत्रों में शराब के दुकानों में पहले भीड़ लगती है और मंदिरों में बाद में।
बुधवार, 11 नवंबर 2009
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